हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,क्यूबा के राष्ट्रपति ने अमेरिका पर अपने देश के ख़िलाफ़ आर्थिक और ऊर्जा नाकाबंदी बढ़ाने का आरोप लगाते हुए स्पष्ट किया,जबकि ग़ाज़ा में नरसंहार अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, अब 90 लाख से अधिक क्यूबाई लोगों पर आर्थिक नाकाबंदी और ऊर्जा नाकाबंदी के माध्यम से वही स्थिति दोहराने की कोशिश की जा रही है।
पार्सटुडे की रिपोर्ट के अनुसार क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कानेल ने अमेरिका की अपने देश के ख़िलाफ़ नीतियों की तीव्र आलोचना करते हुए कहा कि वाशिंगटन आर्थिक और ऊर्जा नाकाबंदी को तेज़ करके क्यूबा में आर्थिक पतन और सामाजिक अशांति पैदा करना चाहता है।
क्यूबा के राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले 7 महीनों में उनके देश को ईंधन की केवल एक खेप प्राप्त हुई है; जो उनके अनुसार जनवरी 2026 में अमेरिकी सरकार द्वारा हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश का प्रत्यक्ष परिणाम है यह आदेश क्यूबा को ईंधन निर्यात करने वाले देशों और पेट्रोलियम उत्पादों को ले जाने वाली शिपिंग कंपनियों को प्रतिबंधों की धमकी देता है।
उन्होंने इन प्रतिबंधों के देश के ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ने वाले परिणामों का ज़िक्र करते हुए कहा कि डीज़ल और ईंधन तेल की कमी ने राष्ट्रीय विद्युत प्रणाली को गंभीर क्षति पहुँचाई है और इसके परिणामस्वरूप 1,400 मेगावाट से अधिक की विकेंद्रीकृत (डिस्ट्रीब्यूटेड) बिजली उत्पादन क्षमता व्यवस्था से बाहर हो गई है जिसके कारण लंबे समय तक बिजली कटौती और क्यूबाई नागरिकों के दैनिक जीवन में व्यापक व्यवधान उत्पन्न हुआ है।
डियाज़-कानेल ने ग़ाज़ा में मानवीय संकट का ज़िक्र करते हुए क्यूबा के ख़िलाफ़ अमेरिकी नीतियों को उसी ढाँचे में रखकर मूल्यांकन किया और कहा,जबकि ग़ाज़ा में नरसंहार अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, अब 90 लाख से अधिक क्यूबाई लोगों पर आर्थिक नाकाबंदी और ऊर्जा नाकाबंदी के माध्यम से वही स्थिति दोहराने की कोशिश की जा रही है; एक ऐसा कृत्य जिसने लोगों की पीड़ा को अभूतपूर्व स्तर तक पहुँचा दिया है।
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